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5 योगासन जो देंगे पीरियड्स के दर्द से राहत

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अधिकांश महिलाएँ हर महीने पीरियड्स के दौरान भयानक दर्द से गुजरती हैं। कुछ महिलाओ में यह दर्द इतना अधिक होता है कि वह अपनी सामान्य दिनचर्या के कार्य भी ठीक तरीके से नहीं कर पाती। इनमे स्कूल या कॉलेज जाने वाली लडकिया और जॉब करने वाली महिलाएँ भी शामिल हैं जिन्हे दर्द की वजह से 1-2 दिन छुट्टी तक लेनी पडती है। यह गर्भाशय की परत को बाहर निकालने के लिये होने वाले संकुचन की वजह से होता है। इससे बचने के लिये महिलाएँ विभिन्न उपाय अपनाती हैं जैसे हीटिंग पैड का प्रयोग, पेट की मालिश करना या घर में बने गुड और आजवायन जैसे काढो का सेवन। यहाँ तक कि कुछ महिलाएँ ओवर-द-काउंटर पेन किलर दवाओ का सेवन भी करती हैं, जो निश्चित रूप से उनके स्वास्थ्य और हॉर्मोन्स पर नकारात्मक प्रभाव डालते हैं। 

  यदि आप भी पीरियड्स के दर्द से बचने के लिये पेन किलर का प्रयोग करती हैं तो सावधान हो जायेँ। यह कुछ देर के लिये आपको दर्द से राहत तो दे देगा लेकिन आपके शरीर और अंगो को नुकसान पहुँचायेगा। आयुर्वेद में पीरियड्स के दर्द से बचने के लिये योग आसन बताये गये हैं जो कि एक स्वस्थ विकल्प है। अल्टर्नेटिव एंड कॉम्प्लिमेंटरी मेडिसिन में प्रकाशित शोध के अनुसार योग आपको पीरियड्स के दौरान ही नहीं बल्कि प्री-मेंस्ट्रुअल सिंड्रोम में भी आराम दे सकता है। यह आपके पीरियड्स के दर्द के साथ-साथ आपके मूड को भी ठीक करने में सहायक है। तो आइये जानते हैं 5 ऐसे योगासनो के बारे में जो आपको पीरियड्स के दौरान शारीरिक और मानसिक रूप से आराम देने में कारगर हैं:

बालासन या चाइल्ड पोज़

बालासन योग विज्ञान में बैठ कर किये जाने वाले सबसे सरल और आराम दायक आसनो में से एक है। यह पीरियड्स के दौरान आसानी से किया जा सकता है। इसके लिये किसी समतल जगह पर वज्रासन में बैठ जायेँ। फिर सांस छोडते हुए अपनी कमर को झुकायेँ और माथे को जमीन पर रख देँ। अपने हाथो को आगे जमीन पर रखेँ। अब अपने शरीर को ढीला छोड देँ और थोडी देर सांस रोकने का प्रयास करेँ। फिर धीरे-धीरे सांस लेते हुए वापस वज्रासन में आ जायेँ। 

यह आसन आपकी रीढ की हड्डी में लचीलापन लाता है, कमर और श्रोणी की मांसपेशियो को आराम देता है और दर्द दूर करता है। इस आसन के अभ्यास से शारीरिक और मानसिक तनाव भी कम होता है।

बद्ध कोणासन या कोब्बलर पोज़

इस आसन को तितली मुद्रा भी कहा जाता है क्योंकि इसमे पैरो के तलवे एक-दूसरे से जुडे होते हैं और घुटने ऊपर-नीचे की ओर जाते हैं जो एक तितली के पंख फडफडाने के समान लगता है। इस आसन को करने के लिये पैरो को सीधा करके बैठ जाये। अब अपने घुटनो को मोड कर अपने तलवो को एक साथ लायेँ। आपके दोनो पैरो की एडी और तलवे एक-दूसरे को स्पर्श करेँ और आप अपने हाथो से पैरो को पकड लेँ। अब दोनो घुटनो को एक साथ बार-बार ऊपर और नीचे की ओर लाये। अपने शरीर पर ज़्यादा दबाव न डालेँ।

यह आसन आपके पूरे शरीर में रक्त परिसंचरण को बढाता है, मूत्राशय, अंडाशय और पेट के अंगो की मालिश करता है और पीरियड्स के दर्द में आराम देता है। इसके अलावा यह तनाव और थकान को भी दूर करता है।

उपविष्ठ कोणासन या वाइड एंगल सीटेड फॉरवार्ड बैन्ड

यह आसन बैठ कर झुकने और शरीर में लचीलापन लाने के लिये एक अच्छी मुद्रा है। यह पैर की मांसपेशियो को फैलाता है, रीढ की हड्डी को मज़बूत करता है और आपकी सामान्य मुद्रा को ठीक करने में सहायता करता है। इस आसन को करने के लिये किसी समतल स्थान पर बैठ जाइये। अब अपने पैरो को अपने शरीर के दोनो ओर इस तरह फैला लेँ कि यह 90 डिग्री का कोण बनाये। अपनी हथेलियो को नीचे रखे और शरीर को अपनी क्षमता अनुसार झुकाये। इस मुद्रा में थोडी देर लम्बी-लम्बी सांसेँ ले और श्वास छोडते हुए वापस अपनी मुद्रा में आ जायेँ।

 यह आसन आपकी पीठ को मज़बूत करने के साथ-साथ आपके पेट और जांघो की मांसपेशियो को स्ट्रेच करता है। आपके पैरो और श्रोणि में खिंचाव आने से यह आपको पीरियड्स के दर्द से राहत दिलायेगा।

उष्ट्रासन या कैमल पोज़ 

उष्ट्र एक संस्कृत भाषा का शब्द है जिसका अर्थ है ऊंट। इस आसन में पीछे झुका जाता है जिससे शरीर में लचीलापन आता है, ताकत मिलती है तथा अनाहत चक्र या ह्रदय चक्र खुलता है। इसे करने के लिये घुटने के सहारे बैठ जायेँ। अब घुटनो पर खडे हो जाये तथा पैरो को जोड कर रखेँ। पीछे की तरफ झुकने की कोशिश करे। बायेँ हाथ से बाईँ एडी को और दायेँ हाथ से दाईँ एडी को पकडने की कोशिश करेँ। पेट को आगे बढायेँ और जांघोँ को सीधा रखने की कोशिश करेँ। अपनी क्षमता अनुसार सर और पीठ को पीछे की तरफ झुकायेँ। थोडी देर तक इसी अवस्था में रहने के बाद वापस पहले वाली मुद्रा में आ जायेँ। 

यह आसन आपके पेट और आंतो में खिंचाव पैदा करता है, पीठ दर्द से मुक्ति दिलाता है और कूल्हे की मांसपेशियो को लचीला बनाता है।

मार्जरी आसन

मार्जरी यानी बिल्ली के समान दिखने के कारण यह आसन मार्जरी आसन कहलाता है। यह न सिर्फ आपकी कमर बल्कि आपके पेट की मांसपेशियो पर भी कार्य करता है। इसके लिये अपने घुटनोँ और हाथोँ के बल आयेँ पीठ को सीधा करके बिल्ली की मुद्रा में आ जायेँ। आपके हाथ आपके कंधो के ठीक नीचे होने चाहिये तथा हथेलियाँ फर्श पर चिपकी हुई रहेँ। अब सांस लेते हुए अपने सर को पीछे की ओर ले जाये और नाभि को नीचे की ओर झुकायेँ। ऐसा करते हुए कमर के आखिरी हिस्से को ऊपर की ओर उठाये तथा इसी मुद्रा में थोडी देर तक रहेँ। अब इसके विपरीत सांस छोडते हुए अपने सर को छाती से लगायेँ और पीठ को  धनुष आकार मेँ ऊपर की ओर उठा लेँ। इस प्रक्रिया को 5-6 बार दोहरायेँ तथा वापस अपनी मुद्रा में आ जायेँ।

 इस आसन को करने से पीठ के दर्द में आराम मिलता है, यह पाचन तंत्र की मालिश करता है तथा रक्त प्रवाह को बढाता है। जिससे पीरियड्स के दर्द में राहत मिलती है। 

ये सभी योगा आसन श्रोणि को खोलते हैं और रक्त प्रवाह को बढाते हैं। ध्यान रहे कि योग करते समय आपको अपनी सांसो पर नियंत्रण रखना है। योगा के अभ्यास करने से चिडचिडापन, मूड स्विंग्स, एंग्ज़ायटी और डिप्रेशन भी ठीक होता है। यह आपको स्वस्थ रखने के साथ आपको पीरियड्स के दर्द से भी छुटकारा पाने में मदद करेगा। तो अब नुकसान दायक दर्द निवारक दवाएँ छोड कर योग को अपनायेँ और स्वस्थ जीवन जियेँ।

डॉ. तबस्सुम हसन

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